सोमवार, 12 नवंबर 2007

आ रहा है लोकतंत्र पाकिस्तान में

लीजिये साहब हो गई अपने पड़ोस में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की घोषणा.. जनरल साहब ने कर दिया ऐलान और खोल दिया रास्ता सच्चे लोकतंत्र का। बस शर्त इतनी सी है कि इमरजेंसी नहीं हटेगी। अयँ.. इमरजेंसी में निष्पक्ष चुनाव.. मगर कैसे?
बात असल में सीधी सी है.. पाकिस्तान में अगर सचमुच निष्पक्ष चुनाव करा दिये तो हो सकता है कि जेहादी जीत जायँ.. या फिर नवाज़ शरीफ़.. अब एक को अमरीका बरदाश्त नहीं कर सकता और दूसरे को जनरल साहब। मगर लोकतंत्र का ड्रामा तो माँगता है न अमरीकी प्रचार तंत्र को ! तो लो बेनज़ीर पर मांडवली कर डाली, मगर जनरल अपने कपड़े भले उतार दें पर कुर्सी से नहीं उतरेंगे। होगा ये कि पूरे सरकारी ताम-झाम के तहत बेनज़ीर का तानाशाही के खिलाफ़ लोकतांत्रिक प्रतिरोध जनरल द्वारा प्रायोजित किया जाएगा.. ताकि जब बेनज़ीर भारी मतों से जीत कर वज़ीरेआज़म की गद्दी पर विराजें तब शेष दुनिया को ये विश्वास दिलाया जा सके कि अब पाकिस्तान को अमरीका और जनरल मिलकर नहीं.. सच में पाकिस्तान की जनता ही चला रही है।
कितना बड़ा पाखण्ड है ये.. कि पक्ष तो हम हैं ही.. और विपक्ष चाहिये.. तो लो उसका भी हम आयोजन किये देते हैं। जैसे साबुन बनाने वाली कम्पनियाँ.. अलग अलग नाम से पचीस साबुन बनाती हैं.. कोई भी खरीदो.. पैसा उन्ही की जेब में जाएगा। लोभ और लालच से संचालित, दुनिया भर में मानवता के सीने पर सवार ये बाज़ार- किस हद तक जा सकता है .. उसका एक और नमूना।
इस खेल के खतरे तमाम हैं.. पाकिस्तान फिर एक बार टूटने से लेकर आणविक हथियार किसी सनकी दहशतगर्द के हाथ लग जाने तक। वैसे यहाँ पर ये याद कर लिया जाय कि आज की तारीख में जो जॉर्ज बुश नाम का एक शख्स सबसे ज़्यादा आतंक मचाये हुए है.. वह कहीं से भी सनकी नहीं है और न ही उसके मुल्क द्वारा किया गया दुनिया का एकमात्र आणविक हमला किसी सनक का नतीजा था। फिर भी हमें सनकी दहशतगर्दों से डरना चाहिये।


4 टिप्‍पणियां:

परमजीत बाली ने कहा…

अभय जी,यह बात तो बिल्कुल सच है की पाकिस्तान में राज किसी का भी हो...पर चलेगा अमरीका का ही ....जनता को धोखा देना...और ताना शाही तो पाकिस्तान kaa जन्म सिद्दि अधिकार है ही...पाकिस्तन मे जब तक कोई बड़ी क्रांती नही होती कुछ बदलने वाला नही।

पुनीत ओमर ने कहा…

वाकई मे दुर्भाग्य सा ही है की हमारे ही पड़ोस मे लोग ऐसी जिन्दगी जीने को मजबूर हैं.

Shiv Kumar Mishra ने कहा…

अब जनरल साहब ने कह दिया है....अब तो पाकिस्तान में उत्सव का माहौल हो जाना चाहिए...

अनूप शुक्ल ने कहा…

भाई अकेली जान को कोई सहयोग न करेगा तो ई सब तो करबै करेगा। :)

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