इन प्रेज़ ऑफ़ अ नान-भिन्नाटी वूमन
मेरी प्यारी भाभी,
सादर चरण स्पर्श,
मैं यहाँ कुशल-मंगल से हूँ और ईश्वर से आप की और भाईसाहब की कुशलता की कामना किया करता हूँ। पिछले दिनों भाईसाहब ने आपकी बहू के हाथ की खिचड़ी खाने की इच्छा प्रकट की थी। मैंने भाईसाहब को निमंत्रण तो उसी वक्त दे दिया था पर इस कामकाजी औरत ने तो..क्या बताएं.. जिन्दगी खराब कर दी हमारी।
अगर आप की बात मानकर वो सिराथू वाली से बिआह कर लिए होते तो आज ये दिन न देख रहे होते। अशोक नगर वाला बंगले के साथ सफ़ेद एस्टीम भी गद्दी के नीचे होती और बीबी हाथ जोड़े खड़ी भी होती और घर में कोई भिन्ना रहा होता तो हम। बड़ा मिसटेक हो गया वरना आज भाईसाहब जैसा जलवा अपना भी होता.. कहा ही है.. बिहाईन्ड एव्हरी सकसेजफ़ुल मैन.. देअर इज अ वूमन। आई वुड से.. देअर इज अ नान-भिन्नाटी वूमन।
आप चिंता न करें.. भाईसाहब की खिचड़ी पक्की है। अरे मेरी इज्जत का सवाल है। सबके सामने कहा है.. अगर नहीं खिलाई तो क्या कहेंगे लोग कि देखो साला जोरू का गुलाम है बीबी इसकी खिचड़ी तक नहीं बनाती। इस मामले में भाईसाहब बड़े लकी हैं उनको आप जो मिली हैं।
अच्छा भाईसाहब का स्वास्थ्य तो ठीक-ठाक है ना.. ये अचानाक अपनी ब्लॉगरी छोड़कर आप को रसोई से निकाल कर आप के पीछे जा कर क्यों खड़े हो गए हैं? क्या उनको लगता है कि औरतों के मुँह नहीं लगना चाहिए? और औरतों के मामले में घर की औरत ज्यादा अच्छा मुँहतोड़ जवाब दे सकती है? खैर जो भी बात हो आप ने भी क्या करारा रख के दिया है.. औरतें इतनी जल्दी भिन्ना क्यों जाती हैं। जरा सी बात में ’नारी मुक्ति संगठन’ खड़ा हो जाता है। जिन्दाबाद मुर्दाबाद शुरू हो जाता है..
आप की यह बात पढ़कर तो हमारा माथा श्रद्धा से और झुक गया कहाँ मिलती हैं ऐसी औरतें आजकल जो जरूरत पड़ने पर मर्द की रक्षा कर सकें। आप महान हैं भाभी जी सचमुच महान! आप को दुर्गा की तरह कलम उठाते देख कर ही तो मेरे अन्दर भी अपनी बात कहने की प्रेरणा जाग गई।
और कहा ही क्या था भाईसाहब ने.. औरतों को किताब पढ़ने की जरूरत क्या है..? ठीक ही तो कहा था मैं तो कहता हूँ कि किताब ही पढ़ने का जरूरत क्या है। अरे इस सर्दी में किताब पढ़ने से अच्छा उसे अलाव में झोंक के थोड़ा आग ताप लो। हाँ नहीं तो.. बेकार की चिकाई चल रही है।
भाईसाहब के प्रमोशन के लिए मैंने सिद्धिविनायक के दरबार में चार आने का प्रसाद चढ़ा दिया है। बड़े प्रसन्न थे.. अपने पास मुम्बई बुलाने की बात कर रहे थे। चार आने की ये बुद्धि रामखिलावन ने दी थी- हमारा चौकीदार- उसका कहना था कि सिद्दिविनायक के दरबार में सब सौ-हजार-लाखों का चढ़ावा चढ़ाएगा, उसमें चार आने का प्रसाद गणपति बाप्पा को अपने पुरातन काल की स्वर्णिम याद दिलाएगा। बस सजल होकर इच्छा पूरन कर देंगे। है न कमाल की बुद्धि अपने रामखिलावन की.. होनी ही है किताब जो नहीं पढ़ा कोई। जैसे अपना भरतलाल .. क्य दिमाग पाया है उसने।
कभी कभी सोचता हूँ कि अगर वो न होता तो भाईसाहब इतनी बड़ी अफ़सरी सम्हालते कैसे? कॉलेज के समय जो दो चार किताब पढ़े थे, उसका असर तो आप के मिलने के बाद ठिकाने लग गया था; लेकिन फिर बीच में गीता बाँच लिए? अगर उन दिनो भरतलाल छुट्टी पर नहीं गया होता तो फिर लोग उनकी बुद्धि ऐसे थोड़ी भ्रष्ट कर पाते। ये आजकल भाईसाहब जो बीच-बीच में बहक के उलटी खोपड़ी की बात करने लगते हैं.. ये सब किताब पढ़ने की बीमारी ही है। आप को याद है न जब तक नहीं पढ़े थे.. तो कितना मीठी-मीठी बात करते थे। लो भूली (और भोली भी) दास्तां फिर याद आ गई..
अब इस याद के बोझ से कलम भारी हो गई अब आगे लिखना मुश्किल हो रहा है..
बड़ों को नमस्कार छोटों को प्यार
कम लिखा ज्यादा समझना
आशा है आप ने इस बार करौंदे का अचार डालते समय मेरा हिस्सा अलग कर दिया होगा.. मैंने यहाँ पर गोभी का अचार डाला है। पिटू मंगल को बनारस जा रहा है महानगरी से, उसके हाथ भेज रहा हूँ। भरतलाल को स्टेशन भेज कर मँगवा लीजियेगा। उसका कोच नम्बर भाईसाहब को मालूम है, उन्होने ही तो कनफ़र्म करवाया है।
आपका आज्ञाकारी देवर
और हाँ भाईसाहब को कहियेगा किताब बुरी चीज है मैं भी मानता हूँ पर कम से कम चिट्ठी की बहिष्कार तो छोड़ दें.. वो मान जायं तो उनको भी चिट्ठी लिखना शुरु करूँ फिर से..
और एक बात और.. भाईसाहब की किताब वाली वो रैक जिसके बराबर खड़े होकर पन्ने पलटते हुए मनन करते रहे हैं उसकी किताबों को रैक समेत इस जाड़े का मुकाबला करने में काम में ले आयं.. कुछ तो उपयोग हो इन कटे हुए पेड़ की रंगी हुई लुगदी का.. इस कोहरे में किसी को चमकाने के काम की भी नहीं रही..
आजकल बाज़ार में मिलने वाले मलाई-मक्खन और किताब में दी हुई इस निमिष की तस्वीर में टेक्सचर का एक अन्तर है जो निश्चित ही मिलावटों का नतीजा है। जैसे कि देशी टमाटर (नाटा और पतली खाल का) बाज़ारू टमाटर (लम्बा और मोटी खाल का) से कहीं ज़्यादा खट्टा होता है। मेरा अनुमान है किताब वाले निमिष की मिठास ठेले वाले मलाई-मक्खन से कहीं ज़्यादा होगी।








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