कोयल दिन भर बोलती है। दहियल सुबह दो घंटे बोलता है और फिर शाम एक घंटा बोलता है। छोटा बसन्ता कभी उत्तर पूर्व से बोलता है और कभी दक्षिण पूर्व से बोलता है। तोते बोलते नहीं चीखते हैं। दक्षिण से चीखते हुए आते हैं और उत्तर को निकल जाते हैं और कभी उलटा। गौरेया जब तुलसी के पत्ते खा रही होती है तो नहीं बोलती। उसके पहले बोलती है। फिर बाद में भी बोलती है। कबूतर कभी नहीं बोलता। बस गुर्राता है। मैना शोर मचाती है। और कौआ अप्रिय ही नहीं प्रिय भी बोलता है। एक पेड़ है जो चिड़ियों की सराय है। सारी चिड़ियों से ऊँचे सुर में उसी पेड़ पर रहने वाली गिलहरी पूँछ उठाकर न जाने क्या-क्या बोलती है। नाली के नीचे रहने वाला चूहा कभी कुछ नहीं बोलता। कुत्ते दोस्तों से बोलते हैं और दुश्मनों से। अजनबियों से वो भी कुछ नहीं बोलते। उनकी सुनते भी नहीं।