भाईसाहब बहुत दिनों से बड़े-बड़े ब्लॉगर जनों की कीर्ति-चर्चा तमाम अखबारों-रिसालों में पढ़ता रहा, मन ही मन कुढ़ता रहा। पर आज सब क्लेश धुल कर मन निमल हो गया। हो गई अपनी भी चर्चा। किसी टैक्टाइल मैगज़ीन में नहीं तो न सही.. आभासी वेब दुनिया भी किसी से कम नहीं। बन्दे के ऊपर इस आलेख के पहले उसी जगह पर रवि रतलामी, प्रत्यक्षा, रवीश कुमार, ज्ञानदत्त पाण्डेय, आलोक पुराणिक, अनिल रघुराज, उदय प्रकाश, पंकज पराशर और युनुस खान भी शोभायमान हो चुके हैं।
यह मधुर चर्चा करने वाली मनीषा पाण्डेय से आप पूरी तरह अनजान न होंगे.. उनकी डायरी को आप मोहल्ले पर देख चुके हैं।
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