गुरुवार, 7 नवंबर 2013

मैं वायु स्वरूप हूँ

मैं वायु स्वरूप हूँ। 
सब कुछ छूते हुए चलता हूँ। 

मैं जल स्वरूप हूँ। 
टूटता जाता हूँ, बहता जाता हूँ, जुड़ता जाता हूँ। 

मैं पृथ्वी स्वरूप हूँ। 
सब कुछ वहन करता हूँ, सहन करता हूँ। 

मैं अग्नि स्वरूप हूँ। 
जल सकता हूँ, सब कुछ जला सकता हूँ। 

मैं आकाश स्वरूप हूँ। 
सब कुछ मेरे भीतर घटित होता है, और मेरे ही भीतर लीन हो जाता है। 

मैं ब्रह्म स्वरूप हूँ। 
मेरे चाहने भर से सब कुछ हो जाता है, और चाहने ही से खो भी जाता है। 

मैं आनन्द स्वरूप हूँ।
किसी वस्तु में कोई आनन्द नहीं, सारा आनन्द मुझ से ही आता है। 


मैं सब कुछ हूँ पर कुछ नहीं हूँ। 
वो कुछ नहीं है पर वही सब कुछ है। 

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गुरुवार, 31 अक्टूबर 2013

ईश्वरीय मिहर


ईश्वरीय मिहर बहुत मामूली चीज़ है। आप कहीं भी जाइये वो होती है। ईश्वरीय चैनल सर्वत्र सर्वसुलभ है। यह अच्छे बुरे का भेद नहीं करता। 

आंधी, बरसात, हवा, पानी, धूप की तरह सब के लिए समान है। कोई भी ले सकता है। फ्री ऑफ चार्ज। बट नो डिस्काउंट। कोई नहीं लेना चाहेगा तो उसको नहीं मिलेगी मिहर। 

आप पानी मत पीजिए, पानी उठकर आपके मुँह में बरसने नहीं लगेगा। आप धूप में नहीं जाएंगे तो धूप दीवार तोड़कर आप तक नहीं आएगी। 

ईश्वर की मिहर साधु भी ले सकता है और शैतान भी। एक नम्बर का दुष्ट भी ईश्वरीय मिहर पा सकता है। पाते हैं। रावण ने दस बार अपना सीस चढ़ाकर शिव से शक्ति प्राप्त कर ली। इबलीस स्वयं को अल्लाह का सबसे बड़ा भक्त मानता है। शायद है भी। इसीलिए नास्तिकों को दुनिया ईश्वर के न्याय से हीन नज़र आती है। भले लोग दुख पा रहे हैं। हरामी लोग मज़े कर रहे हैं। 

भगवान का प्रसाद सब को मिल सकता है। जो जो चाहता है, उसे वही मिलता है। कोई भला चाहता है, कोई बुरा चाहता है। और कुछ ऐसे भी हैं जो कुछ भी नहीं चाहते। मगर सबसे अनोखे तो वे हैं जो इस मिहर को एक चिकाईबाज़ी मानते हैं। बेपर की उड़ाई समझते हैं। ईश्वर चाह कर भी उनकी कोई मदद नहीं कर सकता। 


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बुधवार, 30 अक्टूबर 2013

ईश्वर एक खुजली है

ईश्वर एक खुजली है। जैसे हर आदमी की खुजली उसका वैयक्तिक और एकान्तिक मामला है, वैसे ही ईश्वर भी। 

कोई चाह कर भी अपना ईश्वर दूसरे को नहीं दिखा सकता। ख़ुद प्रत्यक्ष जाना जा सकता है पर दूसरे के प्रत्यक्ष ज्ञान के लिए प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। 


खुजली में एक आनन्द है। ईश्वर स्वयं आनन्द स्वरूप है। 

खुजली मिटाने से नहीं मिटती। खुजाने से और बढ़ती है। ईश्वर के साथ भी ऐसा है। जितना उसे खोजो, वो और पास बुलाता जाता है। 

ईश्वर सारी खुजलियों का उत्स है। 

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