रविवार, 29 सितंबर 2013

संगीत विचारशील नहीं होता

संगीत भावशील होता है। 

संगीत बुद्धि का निषेध करता है। जब तक संगीत चलता है। और आप बह गए तो बुद्धि के हाथ-पैर नहीं चलते। संगीत बांध देता है। रोक देता है। बुद्धि की कैंची की दोनों धारें जुड़ जाती हैं। एक हो जाती है। 


संगीत से एका क़ायम हो जाता है। सांस और धड़कन का। लय और ताल का। मन और तन का। जीव और ईश्वर का। 

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शनिवार, 28 सितंबर 2013

दबने वाला हीन नहीं

दबने वाला हीन मनुष्य हो चाहे न हो, दबाने वाला ही हमेशा कमतर मनुष्य होता है। 

दबाने वाले की हिंसा से प्रभावित होकर जब भी दबने वाला प्रतिहिंसा करता है, वो भी अपनी उच्चता खो बैठता है। 

जिसने हिंसा के जवाब में पलटकर वार नहीं किया, वही श्रेष्ठ मनुष्य है। जिसमें सबर है, धीरज है, करुणा है।

वो भय ही है जो हमें हिंसा के लिए दूसरों को दबाने पर मजबूर करता है। जो अपने भय से संचालित नहीं, जो निर्भय है वही बेहतर मनुष्य है। 

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गुरुवार, 26 सितंबर 2013

अहंकारहीन क्षणों में ही वो मिलता है


अंधकार में मिलता है। अकेले मिलता है। 

कोई साथ जा ही नहीं सकता। आप ख़ुद भी नहीं जा सकते।
ख़ुदी छोड़कर जाना पड़ता है। बेख़ुदी में मिलता है।

वहाँ बस वही मिलता है।


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