सोमवार, 20 जनवरी 2014

आआपा का समर्थन

मैं आने वाले चुनावों में आआपा का समर्थन करने का इरादा रखता हूँ!

कारण:

१। अरविन्द केजरीवाल और योगेन्द्र यादव मेरे भीतर, किसी भी अन्य राजनेता से अधिक भरोसा जगाते हैं। मुझे वे किसी भी दल के अन्य नेताओं से अधिक ईमानदार, सत्यनिष्ठ, और अपने ध्येय के प्रति समर्पित समझ आते हैं।

२। वे साम्प्रदायिक नहीं हैं। आरक्षण को लेकर उनके बारे में कुछ संशय है। मगर मैं नहीं समझता कि वो आरक्षण के ख़िलाफ़ जाने की भूल करेंगे।

३। उनकी आर्थिक नीतियां स्पष्ट नहीं हैं। मगर इन हालात में जबकि भाजपा और कांग्रेस एक ही आर्थिक नीति की हिमायती है, आआपा कम से कम अन्य बिन्दुओं के आधार पर उनसे बेहतर विकल्प लगती है। और शायद वो ऐसी आर्थिक नीति लेकर आ सके जो समाज के समान विकास करने में मददगार सिद्ध हो, ऐसी उम्मीद तो की जा सकती है!

४। वे स्वराज की बात कर रहे हैं, शासन तंत्र की निर्देश श्रंखला को ऊपर से नीचे के बदले, नीचे से ऊपर कर देने की बात कर रहे हैं- ये बड़ा मुद्दा है। अगर वो ये न भी कर सकें तो भी इस मुद्दे को फोकस में लाने के लिए ही उन्हे वोट दिया जाना चाहिये ताकि आगे लड़ाई का मुद्दा ये रहे!

५। इस समय देश में उनके पक्ष में माहौल बना हुआ है। लोग एक विकल्प खोज रहे हैं। ख़ासकर कांग्रेस का विकल्प! आआपा में कांग्रेस का असली विकल्प बनने की सारी सम्भावना मौजूद है। ये कोई क्रांतिकारी विकल्प नहीं है। आआपा सारी समस्याएं सुलझा दे- ऐसी उम्मीद करना भी व्यर्थ है- पर उसे एक अवसर दिया जाना चाहिये! देखें, वे क्या कर सकते हैं!

६। ये ठीक है कि ऐसा विकल्प बनाना आसान नहीं। दो लोगों के भरोसे विकल्प नहीं बनता। देश भर में तमाम अवसरवादी तत्व आआपा ज्वाइन कर रहे हैं। वो अपनी पुरानी संस्कृति इधर भी ले आएंगे। पर क्या कर सकते हैं? हमारे लोग जैसे हैं वैसे हैं। अगर हमारे देश के बहुत सारे लोग भ्रष्ट, अवसरवादी, और गहराई में जातिवादी और साम्प्रदायिक भी हैं- तो हैं। शुरू यहीं से करना होगा! कोई जादू की छड़ी नहीं है। या तो फिर उम्मीद छोड़ कर आदमी बस गरियाता रहे- सब साले चोर है! इस मुल्क का कुछ नहीं हो सकता!

७। हो सकता है तमाम ऐसे मामले हों जिस पर आप आआपा से सहमत न हों, मैं भी नहीं हूँ। पर ये समय असहमत होकर नए विकल्प से बनने के पहले ही टूट कर अलग हो जाने का नहीं, बन रहे विकल्प को बल प्रदान करने का है! नहीं तो जान लीजिए अगर आआपा आने वाले चुनावों में एक महत्वपूर्ण संख्या में सीटें नहीं जीत सकी तो सरकार या तो कांग्रेस की बनेगी या फिर भाजपा की!

८। चूंकि मैं कांग्रेस के शासन से तंग आ चुका हूँ और मोदी को भी इस देश के सर्वोच्च पद पर नहीं देखना चाहता, इसलिए मैं आने वाले चुनावों में आआपा को वोट देने का इरादा रखता हूँ।

***

शनिवार, 11 जनवरी 2014

हम पर है

फूल खिले हैं।
खुशबू आ रही है।
आनन्द उपलब्ध है।
लेना- न लेना,
हम पर है।

शाम हो रही है।
आसमां रंगीन है।
देखें या देख कर भी न देखें,
हम पर है।

ईश्वर सब जगह है।
सब समय है।
आनन्द बहा रहा है।
शांति उड़ेल रहा है।
नशा लुटा रहा है।
मस्त होना- न होना,
हम पर है।

***

गुरुवार, 7 नवंबर 2013

मैं वायु स्वरूप हूँ

मैं वायु स्वरूप हूँ। 
सब कुछ छूते हुए चलता हूँ। 

मैं जल स्वरूप हूँ। 
टूटता जाता हूँ, बहता जाता हूँ, जुड़ता जाता हूँ। 

मैं पृथ्वी स्वरूप हूँ। 
सब कुछ वहन करता हूँ, सहन करता हूँ। 

मैं अग्नि स्वरूप हूँ। 
जल सकता हूँ, सब कुछ जला सकता हूँ। 

मैं आकाश स्वरूप हूँ। 
सब कुछ मेरे भीतर घटित होता है, और मेरे ही भीतर लीन हो जाता है। 

मैं ब्रह्म स्वरूप हूँ। 
मेरे चाहने भर से सब कुछ हो जाता है, और चाहने ही से खो भी जाता है। 

मैं आनन्द स्वरूप हूँ।
किसी वस्तु में कोई आनन्द नहीं, सारा आनन्द मुझ से ही आता है। 


मैं सब कुछ हूँ पर कुछ नहीं हूँ। 
वो कुछ नहीं है पर वही सब कुछ है। 

***
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...