मैं उनकी इस अदा से काफ़ी आतंकित रहता था। तो मैंने उदारमना मित्र भाई अरुण अरोड़ा से इस तक्लीफ़ का ज़िक्र किया। उन्होने अपने स्वभावानुसार ही तुरंत इसका हल बता डाला। कि अपने ब्राउज़र के एडिट पैनल में जाकर कॉपी कर लें या कन्ट्रोल + सी कर लें.. और फिर माइक्रोसॉफ़्ट वर्ड में या पेंट में जा कर पेस्ट कर दें (कन्ट्रोल + वी); बात बन जाएगी। बाद में किसी फोटो एडिटिंग सॉफ़्टवेयर में उसे जीचाहे तरह से क्राप कर लें। मैंने उनके कहे को आजमा कर देखा, और सफल हुआ। दिक़्क़्त बस एक थी कि ब्राउज़र के भीतर के माल को इस तरह से पकड़ा जा सकता है, पर स्क्रीन पर आने जाने वाली दूसरी सामग्रियों को इस तरह से नहीं गिरफ़्तार किया जा सकता।
कुछ दिन शांत बैठा रहा। फिर एक रोज़ श्रीश पंडित का कोई लेख पढ़ा। वे तो हर दो लाइन के बाद एक स्क्रीनशॉट डालते हैं। जिज्ञासा ने फिर फन उठाया। तो उनको एक खत लिख कर विनती की..
उनका जवाब आया..
तब से अब तक इन्तज़ार कर ही रहा था। अचानक आज सवेरे मेरे गूगल रीडर ने श्रीश के पुराने लेख पकड़ कर हाज़िर किए। उसने ऐसा क्यों किया, ये मेरी समझ के बाहर है। तो श्रीश और उनके बहाने अपनी जिज्ञासा की याद ताज़ा हुई। और सोचा कि लगता है पंडितजी बुरी तरह कहीं फँसे हुए है। खुद ही जाके देखो अन्तर्जाल में.. देखा तो ये मिला..
ऊपर की तस्वीर में लाल हो गई खोज से ही कुल सबब है.. स्क्रीनशॉट यूटिलिटी..आप भी आजमा के देखिये.. बुरी तरह आसान है.. कोई अँधा भी कर लेगा.. उसका वेबपेज कुछ यूँ दिखता है..
यहाँ दिए हुए सारे स्क्रीनशॉट्स इसी के मदद से पकड़ कर आप के सामने पेश किए गए। सीधे जाने के लिए यहाँ क्लिक करें। बहुत ही नन्हा सॉफ़्टवेयर है कुल ७६२ केबी का..
कुछ ग़लती हुई हो तो श्रीश समेत सभी ज्ञानीजन सुधार करने में हिचकिचाएं नहीं। और श्रीश, आप योजनानुसार अपनी क्लास ज़रूर लें। निश्चित ही दूसरे बेहतर तरीक़े होंगे यही नतीजा पाने के..