शनिवार, 7 अप्रैल 2007

बाल बराबर फ़र्क है..

बाल बाल बचे.. का आम तौर पर अर्थ होगा कि बाल की मोटाई बराबर हालात के फ़र्क हो जाने से बचाव ना हो पाता.. बाल का अर्थ बच्चा भी है और केश भी.. अब कहाँ बच्चा और कहाँ केश.. मगर एक बात समान है कि दोनों विकासशील हैं.. ये बाल संस्कृत के बल धातु से उपज रहा है.. और शब्दकोश में बल का अर्थ मिलता है..सांस लेना, जीना, अनाज संग्रह करना.. फिर दूसरा अर्थ है देना, मार डालना, बोलना देखना आदि.. कई अर्थ हैं पर रूढ़ हो गया अर्थ है.. सांस लेना, जीना.. जिसके चलते बल संज्ञा का आम अर्थ है शक्ति, सामर्थ्य, ऊर्जा.. अब साँस से शक्ति के सम्बंध की सफ़ाई तत्काल हो जाती है जब हम 'दम लगा के हइशा' याद करते हैं.. और दम मतलब और कुछ नहीं सांस है.. क्यों आपका दम नहीं फूला कभी? .. और साँस क्या है वायु है.. और वायुपुत्र हनुमान से बढ़कर बलवान कौन है.. है कोई?

मज़े की बात है कि फ़ारसी में भी बाल नाम का एक शब्द है.. वहाँ इस का अर्थ कुछ अलग ही है.. बाल का अर्थ डैना या पँख और भुजा या बाज़ू.. फ़ारसी में बल नाम का भी एक शब्द है जो बल्कि का अर्थ रखता है इसके अलावा और कोई दूसरा अर्थ नहीं.. (प्राचीन पारसी में हो तो नहीं कह सकता.. ईरान में इस्लाम के प्रवेश के पहले उनकी भाषा का नाम पारसी ही था..चूँकि अरबी में प की ध्वनि नहीं होती इसलिये अरबों के द्वारा पारसी के फ़ारसी उच्चारण को ही लोकप्रियता प्राप्त हो गई.. जैसे इस देश में रहने वालों ने कभी अपने आपको हिन्दू नहीं कहा.. किसी प्राचीन ग्रंथ में आपको इस शब्द के दर्शन नहीं मिलेंगे.. मगर आज आपको न सिर्फ़ हिन्दू दर्शन समझाने वाले लोग मिलेंगे.. बल्कि उस पर बल देकर गर्व कराने वाले भी मिलेंगे..) माफ़ करें हम वापस बल पर आते हैं..

फ़ारसी के बाल को जिसका अर्थ बाज़ू होता है अगर चाहें तो अपने संस्कृत के बल जोड़ सकते हैं.. क्योंकि बल का आश्रय तो भुजा ही है ना.. फ़ारसी में एक और शब्द है बाला.. जिसका अर्थ है विकासमान, ऊँचाई और क़द.. इन तीनों का सम्बंध हमारे अपने बाल से है जिसमें विकासशीलता का पहलू निहित है.. और अगर फ़ारसी के बाला से बाल को जोड़ें तो भी बाल का अर्थ निकलेगा.. जो सबसे ऊँचे पर हो.. यानी सर के केश.. फ़ारसी और संस्कृत में ऐसी गहरी समानता कोई हैरानी की बात नहीं.. दोनों का मूल एक ही है.. आखिर में फ़ारसी बाला का एक अपभ्रंश जिसे हम अपनी रोज़ाना की भाषा में खूब इस्तेमाल करते हैं.. दूध की ऊपरी परत सबसे ऊपर पड़े होने के कारण कहलाई बालाई.. और ध्वनि परिवर्तन के ज़रिये ब का म हो कर कहलाई.. मलाई..

5 टिप्‍पणियां:

Pramod Singh ने कहा…

मान्‍यवर अभय जी तिवारी जी,
आप भी क्‍या बाल की खाल निकालते रहते हैं!अप्रगतिशील साहित्‍य से अभी आपको बहुत सीखने की ज़रूरत है!
धन्‍यवाद। निकालते रहिये खाल।

नितिन बागला ने कहा…

बाल बाल बचे...
बाकी खोपडी उड गई
:)

Tarun ने कहा…

हमारे यहाँ एक बहुत ही प्रसिद्ध मिठाई होती है जिसका नाम है "बाल मिठाई", सिर्फ नाम में ही बाल होता है मिठाई में तो बिल्कुल नही क्योंकि चाकलेटी स्वाद वाली मिठाई में छोटी छोटी सुगर से बनी गोली लगायी जाती है। वहाँ कोई बाल से नही बचना चाहता ;)

अभय तिवारी ने कहा…

वाह..ये तो अच्छा याद दिलाया आपने..खाई तो मैंने भी है बाल मिठाई..पहाड़ियों के साथ रहो तो खानी ही पड़ती है..होती भी है अनोखी जैसे कि बाल का यह प्रयोग.. सोच में डाल दिया आपने.. इस बाल का मूल क्या है..?

मोहिन्दर कुमार ने कहा…

एक बाल वह भी होती है जिसने...इण्डियन क्रिकट टीम को धराशायी कर दिया...उस का जिक्र नही किया आपने... हा हा

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