शनिवार, 28 सितंबर 2013

दबने वाला हीन नहीं

दबने वाला हीन मनुष्य हो चाहे न हो, दबाने वाला ही हमेशा कमतर मनुष्य होता है। 

दबाने वाले की हिंसा से प्रभावित होकर जब भी दबने वाला प्रतिहिंसा करता है, वो भी अपनी उच्चता खो बैठता है। 

जिसने हिंसा के जवाब में पलटकर वार नहीं किया, वही श्रेष्ठ मनुष्य है। जिसमें सबर है, धीरज है, करुणा है।

वो भय ही है जो हमें हिंसा के लिए दूसरों को दबाने पर मजबूर करता है। जो अपने भय से संचालित नहीं, जो निर्भय है वही बेहतर मनुष्य है। 

***

2 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सहना शक्ति है पर एक सीमा तक ही..

Vimal Shukla ने कहा…

किसी के सामने तीसरा गाल करने की नौबत आने पर हिंसा से बेहतर कोई समाधान नहीं

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