सोमवार, 27 अप्रैल 2009

एक जवां शेर की मौत

फ़ीरोज़ खान अब हमारे बीच नहीं हैं। पिछले लगभग एक साल से वे कैंसर से पीड़ित थे। माफ़ी चाहता हूँ – उनके जैसे जवांमर्द के लिए ‘पीड़ित थे’ कहना, उनकी शान में गुस्ताखी होगा। १९३९ में जन्मे फ़ीरोज़ खान कभी बूढ़े नहीं हुए। जवानी में ही यह शेर अन्तिम नींद को सो गया; पता नहीं इस बात पर खुश हुआ जाय कि अफ़सोस किया जाय। अंग्रेज़ी में एक फ़्रेज़ है – लिव लाइफ़ किंग साइज़- वह उनके ऊपर मुकम्मल बैठता था।

वह मूलतः अभिनेता थे। साठ के दशक में उन्होने बी ग्रेड फ़िल्मों में नायक के बतौर और ए ग्रेड फ़िल्मों में सह नायक के बतौर कई फ़िल्में की – कई सफल और तमाम असफल। मगर हम उन्हे सत्तर के दशक के अनोखे अन्दाज़ वाले निर्माता-निर्देशक के बतौर ज़्यादा जानते हैं।

क्या दौर है, क्या चल रहा है, क्या बिक रहा है इत्यादि की परवाह किए बग़ैर उन्होने अपनी पसन्द की फ़िल्में बनाईं। अपराध, धर्मात्मा आदि फ़िल्मों से शुरुआत करके उन्होने क़ुर्बानी और जांबाज़ में अपना चरमोत्कर्ष पाया। अपने भीतर ही भीतर घुटने वाले एंग्री यंग मैन के पर्सोना से बिलकुल अलग उन्होने अपनी तबियत के अनुरूप एक बेख़ौफ़, बेलौस, मस्तमौला नायक के ढब में अपने को ढाला और दर्शको की वाहवाही लूटी।

बाद के दौर में आई उनकी फ़िल्में बिलकुल नहीं चली, पर उन्होने घबराकर फ़ार्मूलेबाज़ी के सुरक्षा कवच में दुबकना कभी नहीं स्वीकारा। और अपनी शर्तों पर जीते रहे।

तमाम लोग कह सकते हैं कि उनकी फ़िल्मों का भारतीय समय की सच्चाई से कोई सरोकार नहीं रहा। मगर फ़ीरोज़ खान वो अकेला शख्स था जो पाकिस्तान जा कर उनकी आँख में उंगली डाल कर उन्हे भारतीय समाज (और पाकिस्तानी समाज भी) की सच्चाई का आईना दिखा कर आया। ये अलग बात है कि तमाम तथाकथित सरोकारधर्मी फ़ीरोज़ खान के कडु़वे सच के लिए शर्मिन्दा होते रहे और माफ़ी माँगते रहे जबकि इस हक़बयानी के लिए जनरल मुशर्रफ़ ने उन्हे जीवन भर के लिए पाकिस्तान आने से बैन कर दिया।

फ़रदीन खान के शब्दों में उनके पिता एक रॉक स्टार* थे। मैं उनकी इस राय से सहमत हूँ। उनका जाना हमारे बीच से एक बेहद रंगीन और अनूठी शख्सियत की विदाई है। मैं उन्हे सलाम करता हूँ।

*रूढ़ अर्थों में रॉक संगीतकार मगर समकालीन अर्थों में एक ऐसा व्यक्ति जो अपनी शर्तों पर जीवन जीते हुए एक सेलेब्रेटि साबित हो।

5 टिप्‍पणियां:

MAYUR ने कहा…

फिरोज़ खान का ओहदा बहुत ऊँचा है , और उनके पुत्र और इस पीड़ी से कहीं ऊँचा , वे तो बस वे ही हैं जो हमेशा सचमुच जवान ही रहे

Anil ने कहा…

िजस देश के बड़े-बड़े नेता जिन्ना को सेक्युलर करार दे आयें, वहीं खान साहब का दिलेरी से तथ्यों का कह जाना उनकी बहादुरी की गवाही है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

फीरोज मेरी पसंद के इंसान थे। उन्हें हार्दिक श्रद्धांजली।

मनोज गुप्ता ने कहा…

"India is a secular country, Muslims there are making a lot of progress. Our President is a Muslim, the PM a Sikh. Pakistan was made in the name of Islam, but look how Muslims are killing each other.”
ये वो शब्द हैं. जिन्होंने पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ को आइना दिखा दिया था.
फिरोज़ खान परदे पर ही नहीं असल जिन्दगी में भी दिलेर इन्सान थे. मेरी श्रद्धांजलि.

बोधिसत्व ने कहा…

फिरोज़ खान साहब को मेरी श्रद्धांजलि.उन्हें इनर सर्किल में लोग एफ के कह कर बुलाते थे। उनकी जवाँदिली के हजारो किस्से है।

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