सोमवार, 9 मार्च 2009

सरपत... तलवार से तेज़ घास

पिछले कुछ माह से जिस लघु फ़िल्म के निर्माण में व्यस्त था, आखिरकार वह सम्पन्न हुई। फ़िल्म की पटकथा मैंने पिछले बरस मई में ही लिख ली थी मगर शूटिंग दिसम्बर में मुमकिन हुई। तमाम दोस्तों और शुभचिन्तकों ने उदार मन से इस फ़िल्म के निर्माण में सहयोग किया, तब जा कर ये लघु फ़िल्म तैयार हो सकी। जनवरी और फ़रवरी माह फ़िल्म के पोस्ट-प्रोडक्शन में गए।
अब यह फ़िल्म एक डी वी डी की शक़ल में एक स्वतंत्र अस्तित्व अख्तियार कर चुकी है। इरादा रखता हूँ कि अधिक से अधिक मंचो पर इस फ़िल्म का प्रदर्शन कर सकूँ।

दस से पन्द्रह मार्च तक मैं दिल्ली में हूँ; दिल्ली के मित्र अगर मेरे इस लघु प्रयास को अपना समय देंगे तो मुझे खुशी होगी।
फ़िल्म की अवधि है लगभग अठारह मिनट। कैमरा किया है सुधीर पलसाने ने और मुख्य कलाकार हैं प्रशान्त नारायनन, रचना शाह और गरिमा श्रीवास्तव।

34 टिप्‍पणियां:

पंगेबाज ने कहा…

बधाई जी आपको और साहब समय क्या देना है . जब आपके पास जरा सा वक्त निकले घंटी मार देना हम भी उत्सुक है आपकी इस मेहनत को देखने और सराहने के लिये अब आप दिल्ली मे हो और मुलाकात ना हो ऐसा संबव है क्या ?
आपके प्रयास के सफ़ल होने के लिये ढेरो शुभकामनायो सहित

Cyril Gupta ने कहा…

मुबारक, देखने का इंतजार रहेगा.

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

बिल्कुल जी हम भी आपके इस प्रयास को जरुर देखना चाहेंगे। पर जगह और दिन का नाम तो आपने दिया नही जहाँ यह फिल्म दिखाऐगे आप।

आभा ने कहा…

बहुत बहुत बधाई...

Arvind Mishra ने कहा…

बधाई ,शुभकामनाएं कभी बनारस आयें तो हम भी इसके मुन्तजिर हैं !

अजित वडनेरकर ने कहा…

बधाई...ये हुई न शानदार बात..
हमें फ्लैप बहुत आकर्षक लग रहा है...निश्चित ही फिल्म भी पसंद आएगी।
किस विध मिलना होय ?

हर्षवर्धन ने कहा…

सर, बधाई और शुभकामना
मैं दिल्ली में ही हूं ये बताइए कब किस दिन ये फिल्म देखी जा सकती है समय किसी भी तरह निकाला जाएगा।

Beji ने कहा…

हम कैसे देखेंगे....?

seema gupta ने कहा…

बहुत बहुत बधाई...

regards

अफ़लातून ने कहा…

सरपत ,सरकन्डा और पतलो एक्के है,न?

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) ने कहा…

आपको इस लघु फिल्म के सफल होने की बहुत-बहुत शुभकामनाएं.. होली की भी शुभकामनाएं

anitakumar ने कहा…

बधाई , फ़िल्म हम भी देखना चाहेगे

रंजना ने कहा…

बहुत बहुत बधाई...पर हम कैसे देखेंगे ...Kripaya batayen..

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

फिल्म के पूरा होने पर बधाई! हम भी इसे देखना चाहेंगे। लेकिन कब और कहाँ यह संभव होगा कहा नहीं जा सकता। यह नई सूचना है कि आप भी अब दिल्ली में हैं।

Shiv Kumar Mishra ने कहा…

अभय जी बहुत-बहुत बधाई. फिल्म की सफलता के लिए शुभकामनाएं. कलकत्ते भी आना होगा क्या? मैंने सुना है यहाँ भी सिनेमा प्रेमी रहते हैं. अगर हमारे शहर आयें तो हम भी देख लेंगे.

Rupa Abdi ने कहा…

Mubaarak ho !!

Jahan tak main janati hoon, sarpat, ek janglee ghans - scientific name :Saccharum spontaneum ki patti, jis ki dhaar badi tez hoti hai, ko kahaa jaataa hai. Aapne jo photo dikhaai hai usme yaha ghans kahin nazar nahin aarahi. Main ek botanist hoon is liye baal ki khaal utaar rahin hoon !!

Sankshept main apnee flim ki kahanee likh sakaen to badi meherbaani hogi - unke liye jo yaha film nahin dekh payange.

I am sending you a photo of this grass by mail. Perhaps you could use it for your cover. Many similar photos are available on the net.

sonali ने कहा…

Many congrats!! Looks interesting...lemme know when are you coming back to Mumbai. My friends would definitely like to see it. Poor me, I can't be there. But I am sure I gonna get great feedback from my friends if they get to see it. Is there any way I can see it?

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

Congrats on this project Abhay bhai
होली पर्व की सपरिवार शुभकामनाएँ आपको
स्नेह,
- लावण्या

मैथिली ने कहा…

बहुत बहुत बधाई और अब आपके दिल्ली आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
इस लघु फिल्म बनाने के दौरान आपके अनुभवों को जानने की जिज्ञासा भी रहेगी.

मीनाक्षी ने कहा…

अभयजी, बहुत बहुत बधाई ...इंतज़ार है जगह और वक्त जानने का...खुशी होगी अगर हम देख पाए..सफलता मिले इसके लिए ढेरो शुभकामनाएँ..

Sanjeet Tripathi ने कहा…

बधाई!! परंतु मैं छत्तीसगढ़ में हूं।

गरिमा श्रीवास्तव वही जो कभी उत्तरप्रदेश में सहारा समय की स्ट्रिंगर थीं और विक्रांत जी की धर्मपत्नी हैं??

अभय तिवारी ने कहा…

mitro.. aap sabhi ka bahut shukriya..

abhi dilli pahuncha hun.. jaise hi koi karyakram taya hota hai.. sochit karunga.

Rupa ji@
aap ki jankari solah aana sach hai. film me vo ghaas nahi hai phir bhi naam sarpat hai.. as a metaphor.
photo bhejne kaa shukriya.

meri koshish rahegi ki aap sabhi mtro ko yeh film dikha sakun.

Sanjeet@
aap ne Garima ko sahi pahchana.

cmpershad ने कहा…

फिल्म बनाने के लिए तो काफी पापड बेलने पडते हैं। आपने काफी कठिनाइयां झेल कर इसे बडी लगन से तैयार किया होगा। आपकी इस फिल्म की सफलता की कामना करते हैं।

swapandarshi ने कहा…

mujhe bhee dekhane kee ichchha hai, kaise sambhav hai? kya CD khareedee ja sakatee hai?

Rajeev (राजीव) ने कहा…

अभय जी, आपको इस चलचित्र परियोजना के सफलतापूर्वक सम्पन्न होने पर बहुत बहुत बधाई और इसकी भावी सफलता के लिये शुभकामनाएं। यदि अवसर मिला तो हम भी आपके इस प्रयास को देखेंगे, आपसे इसके बारे में जानकारी भी लेंगे और आपके अनुभवों को भी साझा करेंगे।

सागर नाहर ने कहा…

बहुत बहुत बधाई,
दुआ करते हैं कि आपका यह प्रयास सफल हो।

अशोक पाण्डेय ने कहा…

अभय भाई, लघु फिल्‍म के लिए हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं। मेरी भी इच्‍छा है आपकी बनायी फिल्‍म को देखने की, लेकिन यह किस तरीके से संभव होगा समझ नहीं पा रहा हूं। यदि इसकी सीडी उपलब्‍ध होनेवाली हो तो कृपया ब्‍लॉग पर जानकारी दें कि उसे कहां से प्राप्‍त किया जा सकता है।

Raviratlami ने कहा…

"...इरादा रखता हूँ कि अधिक से अधिक मंचो पर इस फ़िल्म का प्रदर्शन कर सकूँ।..."

तो फिर इसे यू-ट्यूब पर क्यों नहीं डालते? हमें ही भेज दीजिए, हमीं डाल देंगे. :)

मुनीश ( munish ) ने कहा…

itz a brilliant film bhai ! now starts the actual exercise.hope u excel in that as well.

M.A.Sharma "सेहर" ने कहा…

Well Congrates !!

moreover comment note is awesome.hahaha

shows the cool n compose nature

Keep going !!!

paricharcha ने कहा…

बधाई हो.

कभी बंगलोर आना हो तो बताएं. सेवा हाजिर रहेगी. -कौतुक

Reality Bytes ने कहा…

स्वतंत्र अस्तित्व??

बोधिसत्व ने कहा…

मेरी भी बधाई....देर से

Rajesh ने कहा…

Bhaiye! mujhe yeh film dekhni hai. Iske ke liye mujhe kyaa karnaa hogaa? (sirf India nahi aa saktaa filhaal)

agar aap kisi tarah se dikhwaa den, to bahutte meharbaani. aapke turant ref ke liye, rajsrivastavaa@yahoo.com.
Ji dhanyabaad.

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