गुरुवार, 10 जून 2010

शब्द चर्चा समूह



हिन्दी शब्दों के समान्तर अर्थ;
हिन्दी से उर्दू व उर्दू से हिन्दी में अर्थ;
अंग्रेज़ी से हिन्दी व हिन्दी से अंग्रेज़ी में अर्थ;
हिन्दी से अन्य भारतीय भाषाओं व अन्य भारतीय भाषाओं से हिन्दी में अर्थ;
हिन्दी से अरबी-फ़ारसी व अरबी-फ़ारसी से हिन्दी में अर्थ
पर चर्चा का एक मंच।




मित्रो,
लिखते हुए,
अक्सर किसी भाव या विचार को चुभलाते हुए,
उसके स्वाद लायक़ उपयुक्त शब्द की कमी हम सब ने महसूस की है,
और ऐसा भी हुआ है कि शब्दकोश के पन्नो पर फ़िसलती उंगलियाँ
हमें सही अभिव्यक्ति तक ले जाने में असमर्थ हुई हैं।
आभासी जगत की इन नज़दीकियों ने जो हमें मौक़ा दिया है
उसके ज़रिये हम एक-दूसरे को
उसकी सही अभिव्यक्ति तक पहुँचा सकते हैं।
ये समूह बस इसीलिए!

समूह का पता यह रहा: http://groups.google.com/group/shabdcharcha?hl=en

चर्चा देखने के लिए कोई बन्दिश नहीं
मगर चर्चा में भाग लेने के आप समूह की सदस्यता हासिल कर सकते हैं।
आप सबका इस समूह में स्वागत है!

12 टिप्‍पणियां:

v9y ने कहा…

पते की कड़ी ठीक नहीं है.

अभय तिवारी ने कहा…

सुधार दी है..

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

सुंदर प्रयास है।

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) ने कहा…

अरे वाह, सुन्दर प्रयास है..

Jandunia ने कहा…

इस पोस्ट के लिेए साधुवाद

निशांत मिश्र - Nishant Mishra ने कहा…

मैं तो हूं ही.

अजित वडनेरकर ने कहा…

अभय भाई,
पिछले साल इस पर अपनी बात हुई थी। मैने इस विचार के प्रति सहमति जताई थी। आपने यह जिम्मेदारी मुझे सौप दी थी। खेद है कि अत्यंत व्यस्ततावश मैं इस और ध्यान नहीं दे पाया था, अलबत्ता यह बात रह रह कर कौधती थी। आपने इसे साकार कर बहुत अच्छा किया। निश्चित ही हम सब इस साझेदारी मंच से बहुत कुछ हासिल कर सकेंगे और दिलचस्प चर्चा के जरिए भाषा के प्रति उदासीन माहौल में रस घुलेगा।
बधाई और आभार

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

अभय जी ये प्रयास बहुत सुन्दर और सार्थक रहेगा। शुक्रिया आपका।

संजय बेंगाणी ने कहा…

हिन्दी से उर्दू व उर्दू से हिन्दी में अर्थ;

हिन्दी से अन्य भारतीय भाषाओं व अन्य भारतीय भाषाओं से हिन्दी में अर्थ;

मान्यवर उर्दू भारतीय भाषा नहीं है क्या? :) अलग से उल्लेख है इसलिए पूछा.

आपका यह प्रयास काफी अच्छा है. शुभकामनाएं. हम बेसी ज्ञानी टाइप आदमी नहीं है फिर भी इस मंच पर जानकारी पाना और देना रूचिकर रहेगा.

अभय तिवारी ने कहा…

संजय जी,

पाकिस्तान के लोग जब हम भारतीयों से मिलते हैं तो चौंक पड़ते हैं क्योंकि उन्हे लगता है कि हम इतनी अच्छी उर्दू कैसे बोल लेते हैं?
वे ये नहीं जानते कि उर्दू मूलतः दिल्ली की ज़ुबान है, और हिन्दी भी। पहला और बड़ा फ़र्क़ तो लिपि का है.. मगर दूसरा मगर गौण अन्तर शब्द-सम्पदा का है।
उर्दू, हिन्दी से किसी भी दूसरी भाषा से अधिक क़रीब है, लगभग जुड़वाँ बहन। इसी रिश्ते से उस का उल्लेख अन्य भारतीय भाषाओं से अलग किया गया है।

Sanjeet Tripathi ने कहा…

shukriya, join kar raha hu, shabdo ko lekar meri samajh badhegi to sahi....

Rangnath Singh ने कहा…

यह प्रयास अति सुंदर है। इसी बहाने हम शब्द-सचेत हो सकेंगे।

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