रविवार, 31 अगस्त 2008

वाल-ई में हॉलीवुडीय कचड़ा

पृथ्वी एक कबाड़खाने में तब्दील हो चुकी है। जीवन का कहीं नामोनिशान नहीं है, सिवाय एक तिलचट्टे के जो वाल-ई नाम के एक रोबोट का पालतू है। न कोई इन्सान है, न जानवर, और न पेड़-पौधे। सोलर बैटरीज़ से चलने वाला वाल-ई हर जगह छितरे पड़े कबाड़ को छोटे-छोटे घन में बदलने की बुद्धिमान मशीन है। उस के भीतर इतनी मनुष्यता है कि आप ये महसूस करने लग सकते हैं कि सम्भव है कि मनुष्य भी एक अति-विकसित मशीन है जो अपना पुनरुत्पादन कर सकता है।

स्टार वार्स के आर टू डी टू की याद दिलाने वाला वाल-ई एक रोज़ पाता है कि एक स्पेस-शिप एक अन्य रोबोट को उसकी विध्वंस दुनिया में छोड़ गया है। वाल-ई से कहीं अधिक विकसित ये रोबोट अपनी प्रकृति में बेहद विनाशकारी है और थोड़ी सी आहट पर ही मिसाइल छोड़ देता है/देती है।

थोड़े ही घटना क्रम के बाद ये स्थापित हो जाता है कि उसका नाम ईवा है और वह सम्भवतः स्त्रीलिंग है (नाम है ईवा)। आगे की कहानी इन दोनों रोबोट के बीच एक रूमानी सम्बन्ध पर टिकी है जिस पर आगे चलकर डिज़्नी हमें साइंस फ़िक्शन और फ़ेयरी टेल रोमांस का चाशनी में लथेड़ने लगता है। (कभी-कभी सोचता हूँ कि हम रोमांस के कितने भूखे हैं? हॉलीवुड तो तब भी दूसरी कि़स्म की फ़िल्में बनाता है पर हम...?)

ईवा विनष्ट और ज़हरीली हो चुकी पृथ्वी पर जीवन की दुबारा खोज करने आई है। जैसे ही उसे एक पौधे की भेंट वाल-ई द्वारा प्राप्त होती है, उसका सिस्टम शट डाउन हो जाता है। और वह अपने मिशन की सफलता का सिगनल अन्तरिक्ष में भेजने लगती है। वाल-ई उसकी इस चुप्पी से परेशान हो जाता है और अपना सारा क्रिया कलाप भूलकर उसी का दीवाना हो जाता है। यहाँ तक कि ईवा को लेने आए स्पेस-शिप पर लटक कर स्पेस स्टेशन एक्सिऑम तक पहुँच जाता है।

एक्सिऑम पर मनुष्य हैं जो पृथ्वी के नष्ट हो जाने के बाद से हज़ारों साल से किसी ऐसे ग्रह की तलाश में हैं जिस पर रहा जा सके। इस यात्रा का उनकी बोन डेन्सिटी पर इतना अधिक दुष्प्रभाव पड़ा है कि वे खड़े तक नहीं हो सकते और अपने सभी कामों के लिए रोबोट पर निर्भर हैं। अमरीकी जीवन(और धीरे-धीरे शेष दुनिया) जिस बीमारी की चपेट में फूलता जा रहा है उस मैक्डॉनाल्ड संस्कृति की एक भयावह तस्वीर दिखती है यहाँ.. जो मशीनीकरण और बाज़ारीकरण पर एक अच्छी टीप है।

पर बहुत जल्दी फ़िल्म एक ऐसे बेहूदे कथानक की बैसाखियाँ पकड़ लेती है जिस के सहारे डिज़्नी आज तक अपनी हर फ़िल्म बेचता आया है जिस में हीरो-हीरोइन का प्यार और शेष जनता का जयजयकार करना मूल कथ्य बन जाता है। लायन किंग और फ़ाइन्डिंग नीमो तक तो भी तब ठीक था अब वे उन्ही मूर्खताओं को मशीनों पर भी आरोपित कर रहे हैं।

मुझे हैरानी होती है कि क्या वे सचमुच सोचते हैं कि वाल-ई का कथ्य कुछ कमज़ोर रह जाता अगर एक्सिऑम के सारे रोबोट्स और सारे मनुष्य वाल-ई और ईवा की हीरो वरशिप न करते?

वाल-ई का ये पर्यावरण सम्बन्धी सन्देश डिज़्नी ने जापानी एनीमेशन फ़िल्म्स के धुरन्धर हयाओ मियाज़ाकी से सीखा है मगर उस में वो अपनी हॉलीवुडीय खुड़पेंच करने से बाज़ नहीं आए और एक अच्छी खासी फ़िल्म को ज़बरदस्ती के मसालों से सस्ता बना गए। मैं मियाज़ाकी का भक्त हूँ क्योंकि वे अपने सन्देश में मूर्खताओं का मिश्रण किए बिना ही उन्हे इतना सफल बनाना जानते हैं कि डिज़्नी भी उनसे ईर्ष्या करता है।

मियाज़ाकी तो, आप थियेटर तो क्या शायद डीवीडी लाइब्रेरी में भी न पा सकें.. वाल-ई तो देख ही लें.. तमाम सीमाओं के बावज़ूद बेहतर फ़िल्म है।

आप के देखने के लिए मियाज़ाकी की तमाम फ़िल्मों के टुकड़ों को लेकर बनाया गया एक वीडियो यहाँ चिपका रहा हूँ.. आनन्द लीजिये..

11 टिप्‍पणियां:

दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

एक सुंदर, यथार्थ और कल्याणकारी जानकारी के लिए बधाई!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

उम्दा जानकारी दी है आपने फ़िल्म के बारे में...कभी मौका लगा तो आप द्वारा बताये मियाज़ाकी द्वारा निर्देशक फ़िल्म जरूर देखने का प्रयास करेंगे...लेकिन कहाँ ये बहुत बड़ा सवाल है...
नीरज

अजित वडनेरकर ने कहा…

बढ़िया जानकारी।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

एक अच्छी खोजपरक समीक्षा के माध्यम से रोचक जानकारी के लिए धन्यवाद।

Lavanyam - Antarman ने कहा…

Beautiful clip ..enjoyed it !
Time & Tide , await no one.

अशोक पाण्डेय ने कहा…

हमेशा की तरह उम्‍दा लेखन। जारी रखें।

Ashutosh Kumar ने कहा…

guru, tahan dekh lee ho to kuchh uchariye. n dekhee ho to ttkal dekh daliye. kya kantap political satire hai. hindi cinema ka milestone!

anil yadav ने कहा…

आशंकाओं को बेअंदाज ऊंचाईयों तक तानने से बनने वाली फुरेरी का सुख देने का साधुवाद।

indscribe ने कहा…

Kya huaa Abhay bhai.

Teen hafte guzar gaye, aap kuchh zyaada masruuf haiN shayad!

CHINMAY ने कहा…

abhay ji, film ka achchha vishleshan hai. ab filmad ekhane me maza aayega. aapne mujhe pehachana???????

pankaj ने कहा…

Mera bhi yehi sochna hai walle ke liye.Movie main environmental sentiment dikhave ki rarah hai , aur love story main bhi jaan nahin lagi ,miyakazi ki 2 film dekhi hain maine par woh dono bhi bekar lagi .... though mere pass miyakazi ki saari movies ka collection hai par himmat nahin hai dekhne ki ab...

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